Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
न तथा स्थिरता देहे चित्रपुंसो यथा किल ।
विनाशितो हि चित्रस्थो देहो नश्यति नान्यथा ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रसिद्ध शरीर में निनिमित्तविनाशिता भी चित्रलिखित देह की अपेक्षा अधिक दोष है, ऐसा
कहते हैं।
श्रीरामजी, चित्रलिखित देह तभी नष्ट होती है जब किसी कारणविशेष से उसका विनाश किया
जाय, अन्यथा नहीं। यह अवश्यविनाशी मांस-स्वरूप देह तो किसी कारणविशेष के बिना स्वयं ही नष्ट
हो जाती है