Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, Verse 79
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 28, verse 79 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 28 · श्लोक 79
संस्कृत श्लोक
रागद्वेषमयास्ते वै जम्बुकास्ते धिगस्तु तान् ।
मद्धनं भुक्तमन्येन धनं त्यक्तं मयाऽन्यतः ॥ ७९ ॥
हिन्दी अर्थ
समूल राग-द्वेष का क्रम बतलाते हैं।
मेरा धन दूसरे ने हड़प लिया, दूसरे से अवश्य लेने योग्य धन मैंने प्रमाद से छोड़ दिया - इस प्रकार
प्राप्त एवं विनष्ट धन आदि विषयों में अभिनिवेश से उनके ग्रहण के लिए वध, बन्धन आदि दण्ड देने की
इच्छारूप राग-द्वेषों के क्रम क्या हैं ? यानी तुच्छ हैं