Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 22, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 22 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
कृतप्राक्संनिवेशोऽयमहं स्थितिमिहागतः ।
नेहाभूदुत्तरा पूर्वं ककुब्नायं च भूधरः ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार दिशा और पर्वत की ऐक्य-प्रत्यभिज्ञा भी शोभा-सन्निवेश की समता के कारण ही है,
ऐसा कहते हैं।
महाराज, पहले यहाँ (अतीत कल्प के इस प्रदेश में) न यह उत्तर दिशा थी और न तो यह पर्वत ही
था, किन्तु पहले यह दूसरी ही उत्तर दिशा थी और यह दूसरा ही पर्वत था