Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, Verse 52
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 21, verse 52 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 21 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
गरुडवाहनं विहगवाहनं विहगवाहनं वृषभवाहनम् ।
वृषभवाहनं गरुडवाहनं कलितवानहं कलितजीवितः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पान्तर मे अपने द्वारा देखे गये अन्यान्य आश्चर्यो का कथन करते हुए तत्त्ववेत्ता भ्ुशुण्डजी
प्रकृत विषय का उपसंहार करते हैं।
दीर्घजीविता को प्राप्त हुए मैंने किसी समय यह रहस्य देखा-इस कल्प में प्रसिद्ध गरुडवाहन
श्रीविष्णु, हंसवाहन चतुर्मुख ब्रह्मा बनकर देव, दैत्य आदि की सृष्टिरूप कार्य का सम्पादन करते थे,
हंसवाहन ब्रह्माजी वृषभवाहन रुद्र बनकर संहार करते थे तथा वृषभवाहन महादेवजी विष्णु शरीर
बनकर सृष्टि का पालन करते थे