Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, Verse 6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, verse 6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
प्रकारौ द्वावपि प्रोक्तौ योगशब्देन यद्यपि ।
तथापि रूढिमायातः प्राणयुक्तावसौ भृशम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामभद्र, यद्यपि शास्त्रों में 'योग” शब्द से उपर्युक्त दोनों ही
प्रकार (आत्मज्ञान और प्राणसंरोध) कहे गये हैं, तथापि यह योगशब्द प्राणनिरोध में ही अधिक प्रसिद्धि
को प्राप्त हुआ है