Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, Verse 5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 13, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सुलभत्वाददुःखत्वात्कतरः शोभनोऽनयोः ।
येनावगतमात्रेण भूयः क्षोभो न बाधते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले उन दोनों में कौन-सा प्रकार सरल है“ यों विशेषरूप से श्रीरामजी पूछते हैं।
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे गुरो, उपर्युक्त योगों के प्रकारों में ऐसा कौन प्रकार सरल और कष्टरहित
होने से उत्तम है, जिसके कि एकमात्र अवगत होने पर विक्षेप फिर बाधा नहीं पहुँचाता, कृपाकर उसे
बतलाइये