Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विवेकेनातितीक्ष्णेन बलादय इवायसा ।
मनसैव मनश्छिन्धि सर्वभ्रमस्य शान्तये ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस उपाय के द्वारा मन से मन के ऊपर विजय पायी जाती है उस उपाय को कहते हैं।
जैसे अति तीक्ष्ण लोहे से लोहा काटा जाता है वैसे ही सब भ्रमों की शान्ति के लिए अतितीक्ष्ण
विवेकयुक्त मन से दोषयुक्त मन काटा जाता है