Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
क्षालयन्ति मलेनैव मलं क्षालनकोविदाः ।
वारयन्त्यस्त्रमस्त्रेण विषं प्रति विषेण च ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मन से मन पर विजय पाने में प्राप्त आत्माश्रय दोष का वारण करते हैं।
मल हटाने का विज्ञान रखनेवाले विद्वान् लोग मल से ही मल को धो डालते हैं, अस्त्र से अस्त्रो का
वारण करते हैं और विष से विष को दूर करते हैं