Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 124, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
सन्तोऽतीतं न शोचन्ति भविष्यच्चिन्तयन्ति नो ।
वर्तमानं च गृह्णन्ति कर्म प्राप्तमखण्डितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इष्ट वस्तु के वियोग से अनिष्ट की संभावना है और उससे उत्पन्न शोक से बन्धन की प्राप्ति - यों
आशंका कर कहते हैं।
जो उत्तम पुरुष हैं वे न तो गयी-गुजरी वस्तु के विषय मे शोक करते हैं और न भविष्य के विषय में
चिन्ता ही करते हैं। वे तो वर्तमानकाल में जो कुछ कर्म प्राप्त हो जाता है उसी का यथावत् अंगीकार कर
लेते हैं