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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 123

एक सौ बाईसर्वोँ सर्ग समाप्त एक सौ तेईसवाँ सर्ग अज्ञानी अन्य सिद्धं की अपेक्षा ज्ञानी के परिपूर्णं होने से उसको आकाशगमन और अणिमादि सिद्धियों की इच्छा ही नहीं होती, इस विशेष बात का वर्णन ।

6 verse-groups

  1. Verse 1कहे गये लक्षणोवाले जीवन्मुक्त पुरुष में मणि, मन्त्र आदि के द्वारा सिद्ध हुए पुरुषो की नाई…
  2. Verse 2उस जीवन्मुक्त पुरुष में अन्य सिद्धो द्वारा अनुभूत न होनेवाला निरतिशयानन्द अनुभव ही विशेष…
  3. Verse 3मन्त्रसिद्धि आदि से सिद्ध हुए पुरुषों के रूप से भी मैं ही अवस्थित हूँ, इस तरह की सर्वात्म…
  4. Verse 4यदि अणिमा आदि सिद्धियों को दूसरे प्राप्त नहीं कर सकते, इसलिए उनमें अपूर्व शब्द का अर्थ (अ…
  5. Verse 5तव तत्त्ववेत्ता पुरुष में सिद्धो की अपेक्षा विशेष क्या है, इस प्रश्न पर कहते हैं। यही इसम…
  6. Verse 6रागशून्य होने से जो फल होते हैं उनका तत्त्वज्ञानी के लक्षणो के रूप में वर्णन करते हुए महा…