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Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 122

एक सौ इक्कीसर्वों सर्ग समाप्त एक सौ बाईसवाँ सर्ग सुदृढ आत्मबोध से सम्पन्न तथा तुरीयातीत पद में स्थित जीवन्मुक्त यति की दिनचर्या का लक्षणों से मनु द्वारा वर्णन |

7 verse-groups

  1. Verse 1शनिरस्तनिःशेषविकल्पविष्लवा" (उसके सारे विकल्पविभ्रम विलीन हो जाते हैँ ।) इत्यादि से जो यो…
  2. Verses 2–6उसके अर्थ सिद्ध विद्रत्सन्यास का वर्णन करते हैं। (7)) सम्राट की नाई यानी मनुष्यों के आनन्…
  3. Verses 7–10उसीको स्पष्ट बतलाते हैं। भिन्न-भिन्न जाति के जनसमूह के व्यूह में विहार कर रहा, भेद ओर अभि…
  4. Verse 11ज्ञानकाल में ही मुक्ति तथा देहादि का बाध हो जाने से ज्ञानी को फिर मुक्ति के लिए किसी तीर्…
  5. Verses 12–13अहंकार का नाश मोक्ष है । विभूति और वैभव चाहनेवाले पुरुष को यत्नपूर्वक उस ब्रह्मज्ञानी की…
  6. Verse 14उस जीवन्मुक्त ज्ञानी का पूजन ही परम पुरुषार्थ दिलानेवाले ज्ञान में हेतु भी है, यह कहते है…
  7. Verse 15महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, यों कहकर मनु भगवान्‌ मेरुशिखर के ऊपर चले गये…