Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 122, Verses 12–13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 122, verses 12–13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 122 · श्लोक 12,13
संस्कृत श्लोक
ज्ञानसंप्राप्तिसमये मुक्तोऽसौ विगताशयः ।
अहंभ्रान्तिर्हि बन्धाय मोक्षो ज्ञानेन तत्क्षयः ॥ १२ ॥
स पूजनीयः स स्तुत्यो नमस्कार्यः स यत्नतः ।
स निरीक्ष्योऽभिवाद्यश्च विभूतिविभवैषिणा ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार का नाश मोक्ष है । विभूति और वैभव चाहनेवाले पुरुष को यत्नपूर्वक उस ब्रह्मज्ञानी की पूजा,
स्तुति, नमस्कार, दर्शन ओर अभिवादन करना चाहिए