Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 117
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- Verses 1–4का हेतु क्या है ? विचार कर रहे भी वह राजा जब जगत् के कारण को न समझ सके तब उन्होने एक दिन…
- Verses 5–8इक्ष्वाकु ने कहा : हे भगवन्, आपकी दया ही आपसे धृष्टतापूर्वक पूछने के लिए मुझे प्रेरित कर…
- Verse 9उन प्रश्नों में सर्वप्रथम तत्त्वोपदेश में अत्यन्त उपयोगी होने के कारण “स्वरूपं चास्य की द…
- Verse 10अपने उपादान कारण में परमसूक्ष्मरूप से स्थित कार्य ही अपने कारणों के द्वारा आविर्भूत होता…
- Verse 11वेदान्ती के प्रति कहते हैं। हाँ, इस सृष्टि मे अविनाशी जो पर वस्तु है, वह तो स्थित है ही,…
- Verse 12हे राजन्, यह सम्पूर्ण दृश्यों से भरी हुई सृष्टिपरम्परा उसी सदात्मस्वरूप महान् दर्पण में…
- Verses 13–14तब बहुस्यां प्रजायेय“ इत्यादि संकल्प करके ब्रह्म मेँ जगत् और जीवभाव का प्रतिपादन करनेवाल…
- Verse 15मिथ्याभूत उपाधियों भ्रान्ति के कारण चिदाभासो की कल्पना की गयी है, वस्तुतः उनकी प्रसक्ति न…