Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 111, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 111, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 111 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

मन्येऽस्य दुष्करस्त्यागो न सिद्धिमुपगच्छति । कथमेष किल त्यक्तुं शक्यते योगिनां वर ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

और आत्मा का त्याग भी नहीं हो सकता, क्योकि वह त्याग का विषय है ही नहीं, इस आशय से कहते हैं। हे योगियों में श्रेष्ठ, मैं तो मानता हूँ कि इसका त्याग इतना असम्भव-सा है कि किसी तरह सिद्ध हो ही नहीं सकता, इसलिए इसका त्याग कैसे होगा ?