Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 78
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 78 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 78
संस्कृत श्लोक
या प्रतीतिरनागस्का तच्चिद्ब्रह्मास्मि सर्वगः ।
भूवार्यनिलबीजानां संबन्धेऽङ्कुरकर्मसु ॥ ७८ ॥
हिन्दी अर्थ
पृथ्वी, जल, वायु ओर बीजों का संमेलन होने पर अंकुरादिरूप कार्यो मेँ बाहर निर्गमन के अनुकूल जो
चितिशक्ति भीतर विद्यमान है, वह व्यापक ब्रह्म है, वही मैं हू॥