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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 72

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 72 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 72

संस्कृत श्लोक

अहनिःशेषचक्राणि चिद्ब्रह्माहमलेपकम् । सुषुप्तसदृशं शान्तमालोकविमलात्मकम् ॥ ७२ ॥

हिन्दी अर्थ

“नित्यं वाऽनुभवामृतम्‌* इसका समाधिनिष्ठा के अनुभव से उपपादन करते हुए कहते हैं। सुषुप्ति के सदृश समस्त विकल्पों से वर्जित, उपद्रवों से रहित, निर्मल प्रकाश स्वरूप, मनुष्य से लेकर हिरण्यगर्भ-पर्यन्त होनेवाले विषय सुखों से अत्युत्तम सुखस्वरूप चारों ओर से प्रकाशमान तथा वासनाओं से शून्य चैतन्यात्मक ब्रह्मस्वरूप मैं हूँ