Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 71
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 71 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
आलोकः सुमनोमौनं चिद्ब्रह्मास्म्यमृतं परम् ।
अनारतगलद्रूपं नित्यं चानुभवामृतम् ॥ ७१ ॥
हिन्दी अर्थ
इसका भी पहले की नाईं उपपादन करते हुए उक्तार्थ को ही कहते हैं।
अहंकाररूपी अशेष भोक्ताओं के प्रति तत्-तत् भोग-वृत्तियों की धारारूपी उपाधियों से, मधुधारा
की नाई, निरन्तर चू रहे स्वरूप से युक्त, निरन्तर कूटस्थ के नित्यानुभव आनन्दैकरसभूत एकरसस्वरूप
तथा निर्लेपक परब्रह्मचैतन्यस्वरूप ही मैं हूँ