Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
दुःखितानाम कैव स्याद्रज्जुसर्पभ्रमोपमा ।
संभोगादौ सुखं ब्रह्मण्यास्थिते देहब्रह्मणि ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार भोग, राग आदि की आत्यन्तिक निवृत्ति भी सिद्ध होती है, ऐसा कहते है ।
संभोगात्मक ब्रह्म में देहरूप ब्रह्म के सुखपूर्वक अवस्थित होने पर “यह मुझे प्राप्त हुआ" यह व्यर्थ
इच्छा किस तरह होगी ?