Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
संपन्नमेतन्म इति मुधा स्यात्कलना कुतः ।
वीच्यम्भसोः स्पन्दवतोर्न त्वन्यदम्बुनो यथा ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे राघव, जिस प्रकार वीचि (गमनशील तरंग) ओर जल के स्पन्दयुक्त होने पर भी जल से पृथक्
कुछ भी नहीं है, उसी प्रकार स्पन्दस्वरूप ब्रह्म के होने पर भी त्वत्ता ओर मत्ता कुछ भी नहीं है