Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 11, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 11 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अतो रागविरागाणां मृषेव कलनेह का ।
मरणब्रह्मणि स्वैरं देहब्रह्मणि संगते ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस दृष्टि से आत्यन्तिक अभय-प्राप्ति होती है, यह कहते है ।
भद्र, देहरूप ब्रह्म में मरणात्मक ब्रह्म अपने-आप जब मिल गया, तब रज्जु में भुजंग-भ्रम की नाई
होनेवाला दुःख मिथ्या कल्पना के अतिरिक्त ओर हो ही क्या सकती है ?