Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 105

6 verse-groups

  1. Verses 1–17में अंगना हो गया हूँ। यह स्त्रीभाव रात्रियों मे में केसे निभा सर्वगा । हा ! मैं रात मेँ स…
  2. Verses 18–21उसी न्याय का स्पष्टीकरण करते है । महान्‌ कष्ट यह हो गया कि अब मेरे अपहरण के लिए यहाँ स्वर…
  3. Verses 22–24राजा भी उसके कथन का अनुमोदन कर कहते है। राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, उस तरह की इस…
  4. Verses 25–40मैं तो समझता हूँ कि यह आपका खेद नहीं है, किन्तु केवल खेदोचित वाणी का ही लोकाचार का वर्णन…
  5. Verses 41–49और दिन में कुम्भ का रूप धारण कर मित्र पति के साथ विचरण करती रही
  6. Verse 50किस-किस स्थान में किस-किस तरह उसने विहार किया ? कैलास, मन्दराचल, महेन्द्राचल, सुमेरु तथा…