Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 105
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- Verses 1–17में अंगना हो गया हूँ। यह स्त्रीभाव रात्रियों मे में केसे निभा सर्वगा । हा ! मैं रात मेँ स…
- Verses 18–21उसी न्याय का स्पष्टीकरण करते है । महान् कष्ट यह हो गया कि अब मेरे अपहरण के लिए यहाँ स्वर…
- Verses 22–24राजा भी उसके कथन का अनुमोदन कर कहते है। राजा शिखिध्वज ने कहा : हे देवपुत्र, उस तरह की इस…
- Verses 25–40मैं तो समझता हूँ कि यह आपका खेद नहीं है, किन्तु केवल खेदोचित वाणी का ही लोकाचार का वर्णन…
- Verses 41–49और दिन में कुम्भ का रूप धारण कर मित्र पति के साथ विचरण करती रही
- Verse 50किस-किस स्थान में किस-किस तरह उसने विहार किया ? कैलास, मन्दराचल, महेन्द्राचल, सुमेरु तथा…