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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 39

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 39

संस्कृत श्लोक

रक्तमांसास्थियन्त्रेऽस्मिन्कः स्यामहमिति स्वयम् । यावद्विचार्यते तावत्सर्वमाशु विलीयते ॥ ३९ ॥

हिन्दी अर्थ

किस प्रकार विचार कर देखना चाहिए, यह कहते है। रक्त, मांस तथा अस्थिमय इस देहयन्त्र में “मे स्वयं कौन हूँ ?' इस प्रकार ज्यों ही विचार किया जाता है, त्यों ही सभी अविद्या-परिवार शीघ्र विलीन हो जाता हे