Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 10, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 10 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
आद्यन्तयोरसद्रूपे नूनं परिहृते हृदा ।
सर्वस्मिन्नेव यः शेषस्तमविद्याक्षयं विदुः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
उस प्रकार के विचारवाले मन से आदि-अन्तवाले में असद्रूप सम्पूर्ण दृश्यमात्र का परिहार हो जाने
पर जो शेष रूप से चिदात्मा रहता है, उसे ही विद्वान अविद्या का क्षय कहते हैं, क्योकि अध्यस्त पदार्थ
का बाध अधिष्ठान से भिन्न नहीं होता