Guru's AddaGuru's Adda

Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1) · Sarga 1

15 verse-groups

  1. Verses 1–8को कहने की इच्छा से श्रीवसिष्ठजी पहले आपके प्रश्नों का उत्तर कहने के लिए यह अवसर नहीं है,…
  2. Verse 9हे श्रीरामचन्द्रजी, मोक्षोपाय के उपदेश के सिद्धान्त को यानी ब्रह्मनिष्ठारूप अखण्डाकार बोध…
  3. Verse 10इस समय यदि मैं आपसे कहूँगा भी, तो वह आपके चित्त में आरूढ़ नहीं होगा, इस आशय से कहते हैं ।…
  4. Verse 11जैसे बालकों के विषय में प्रेम की कथाएँ व्यर्थ होती हैं वैसे ही अल्प ज्ञान वाले पुरुषों के…
  5. Verse 12इस प्रकार के प्रश्न भी तभी शोभा देते हैं, इस आशय से कहते हैं। जैसे नारंगी, सुपारी, जम्बीर…
  6. Verse 13जैसे निर्मल वस्त्र में रंग लगता है वैसे ही आत्मज्ञानी, ज्ञान वृद्ध पुरुष में उदार विज्ञान…
  7. Verse 14हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रश्न का उत्तर मैंने भार्गवोपाख्यान में संक्षेप से कह दिया है; ले…
  8. Verse 15अखण्डार्थ का बोध होने पर मेरे उपदेश के बिना भी इस प्रश्न का उत्तर आप स्वयं जान जायेंगे, ऐ…
  9. Verse 16हे सज्जन शिरोमणे श्रीरामचन्द्रजी, सिद्धान्त काल में जबकि आपको आत्मज्ञान हो जायेगा, तब मैं…
  10. Verse 17मेरा उपदेश तो द्वार प्रदर्शनमात्र है, आपको एकाग्रता से स्वयं आत्मदर्शन करना होगा, ऐसा कहत…
  11. Verse 18हे श्रीरामचन्द्रजी, आत्मा के कर्तृत्व और अकर्तृत्व का विचार भी इसी अखण्ड ब्रह्मज्ञान के उ…
  12. Verses 19–43अब वन्ध और मोक्ष का रहस्य दिखलाते हुए वासनाओं के उच्छेद में उपाय क्रम को दशति है। वासनाओं…
  13. Verse 44लक्ष्मण एवं शत्रुघ्न इन तीनों भ्राताओं ने तीन प्रहर तक महर्षि के उपदेश का निरन्तर विचार क…
  14. Verse 45उन्होंने केवल आधे प्रहर (दो घड़ी) तक ही नयनों को मूँदकर उत्तम स्वप्न से युक्त तथा क्षणभर…
  15. Verse 46इस प्रकार पवित्र मनवाले, विवेकी तथा आत्मतत्त्व प्रबोध के कारण विकासयुक्त आशयवाले उन रामचन…