Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 87
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 87 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 87
संस्कृत श्लोक
अजीवन्मुक्तरूपाणां दीनानां मूढचेतसाम् ।
युक्ता हर्षविषादाभ्यां बन्धनी वासना भवेत् ॥ ८७ ॥
हिन्दी अर्थ
जो जीवन्मुक्त
स्वरूप से सम्पन्न नहीं है एवं जो दीन एवं मूढमति हैं, उनकी वासना हर्ष तथा विषाद इन दोनों से
मिली हुई रहती है, यह वासना बन्ध (संसार) देनेवाली होती है