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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 86

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 86 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 86

संस्कृत श्लोक

तामसङ्गाभिधां विद्धि यावद्देहं च भाविनी । तया यत्क्रियते कर्म न तद्बन्धाय वै पुनः ॥ ८६ ॥

हिन्दी अर्थ

रामभद्र, उस शुद्ध वासना का दूसरा नाम असंग हे, इसे आप जानिये । वह तब रहती है, जब तक अवशिष्ट प्रारब्ध कर्मो का विनाश नहीं हो जाता । उस वासना से जो कुछ किया जाता हे, वह पुनःसंसार का कारण नहीं होता