Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
उह्यमानं भवाम्भोधौ वासनावीचिवेल्लितम् ।
निगिरन्तीन्द्रियग्राहा महाक्रन्दपरायणम् ॥ ६४ ॥
हिन्दी अर्थ
संसारसमुद्र
में बह रहे, वासनारूपी वीचियो (गतिशील तरंग) से वेष्टित अतएव निरन्तर महान् क्रन्दन करने में
तत्पर उस अज्ञानी को इन्द्रियरूपी मगर निगल जाते हैं