Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
अतत्त्वज्ञमविश्रान्तमलब्धात्मानमस्थितम् ।
निगिरन्तीन्द्रियाण्याशु हरिणा इव पल्लवम् ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
तब इन्द्रियाँ किसको निगल जाती है, इस पर कहते है ।
जिस प्रकार हरिण पल्लव निगल जाते हैं, वैसे ही इन्द्र्यो तत्त्वज्ञान से शून्य विश्रान्ति से
वर्जित, अप्राप्त- आत्मा तथा स्थिति शून्य मनुष्य को तत्काल निगल जाती है