Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 60
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
स्थिरास्थिरशरीरेषु रम्यारम्येषु वस्तुषु ।
न हृष्यति ग्लायति वा सदा समतयेद्धया ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानवान् चिरस्थायी
देवशरीर तथा कुछ काल तक स्थायी मर्त्य शरीर, एवं उनके भोग्य रमणीय तथा अरमणीय वस्तु इन
सबके विषय में न हर्ष करता हे ओर न तो ग्लानि करता है, क्योकि उसकी समता की भावना सदा
प्रदीप्त रहती हे