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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 57

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 57 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

बिम्बप्रतिविषाकल्कक्षीरेक्षुसलिलान्धसाम् । असक्तबुद्धिस्तत्त्वज्ञो भवत्यास्वादने समः ॥ ५७ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी, जिसके अन्तःकरण में किसी प्रकार की विषयासक्ति नहीं है, वह तत्त्वज्ञ तत्क्षण बुद्धि का विनाश करनेवाला बिम्ब का फल (कुन्दरू का फल), विषप्राय सब ओर से कषाय लगनेवाला फल, क्षीर, इक्षुरस, जल ओर ओदन इन सब विषयों के आस्वादन में सम यानी तुल्यचित्त रहता हे