Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 56
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 56 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 56
संस्कृत श्लोक
अपवित्रमपथ्यं च विषसिक्तं मलाद्यपि ।
भुक्त्वा जरयति क्षिप्रं क्लिन्नं नष्टं च मृष्टवत् ॥ ५६ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी पुरुष अपवित्र, अपथ्य, विषयुक्त, गोमय आदि मल, आद्र तथा रसवर्जित
पदार्थो को खाकर भी तत्क्षण उस प्रकार पचा देता है, जिस प्रकार साधारण मनुष्य परिष्कृत अन्न
को खाकर पचा देता है