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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 5

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

किं कुर्वन्तीह विषया मानस्यो वृत्तयस्तथा । आधयो व्याधयो वापि सम्यग्दर्शनसन्मतेः ॥ ५ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि वैसी स्थिति बनाने की शक्ति न हो, तो भी कहते है । हे प्रिय श्रीरामजी, अथवा यदि सत्तासामान्यरूप शोधित जगत्कारणात्मक तत्त्व में आप स्थिति (चित्त की निश्चलता) करते हैं, तो कुछ अधिक प्रयत्न से यहाँ उक्त आत्मपद प्राप्त कर लेंगे । अखण्डऐक्य के बोध मे यत्न की कुछ अधिक आवश्यकता होती है, इससे "अधिकेन यत्नेन" कहा