Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 42
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 42 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
चन्दनागुरुकर्पूरलाक्षामृगमदेषु च ।
काश्मीरजलवङ्गैलाकङ्कोलतगरादिषु ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार गाँव में आई हुई मृगी किसी का
विश्वास नहीं करती, वैसे ही उन पुरुषों की चारों ओर से छिन्न, शीर्णं तथा तुच्छ अंगवाली बुद्धि
किसी पदार्थ में विश्वास नहीं करती