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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 43

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 43

संस्कृत श्लोक

केषुचिन्न निबध्नाति सौगन्ध्यरतिमेकधीः । समबुद्धिरविक्षोभो मद्यामोदेष्विव द्विजः ॥ ४३ ॥

हिन्दी अर्थ

उनका तरंगसदृश अतिचपल मन, जल में तरंगों की नाई, भयस्थानों में ही उत्तरोत्तर जाता रहते हैं और पर्वत की चोटी से गिर रही प्रबल प्रवाह से युक्त नदियों में गिरा हुआ तृण जिस प्रकार अति दूर बह जाता है, वैसे ही उनका विषयानुपातिस्वभाव चित्त राग आदि से बलपूर्वक अति दूर खिंच जाता है