Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 2
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 2 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
विचारकणिका यैषा हृदि स्फुरति पेलवा ।
एषैवाभ्यासयोगेन प्रयाति शतशाखताम् ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी के इस प्रश्न पर महाराज वसिष्ठजी पहले अर्थ के अनुसार उत्तर देते हैँ ।
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : भद्र , मैंने आपसे इन दुःखों के बीजों के विषय में जो-जो उत्तर
दिया है उस उस की निवृत्ति करने से तत्काल ही पुरुष परम पद प्राप्त करता है