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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 1

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । मनागपि विचारेण चेतसः स्वस्य निग्रहः । मनागपि कृतो येन तेनाप्तं जन्मनः फलम् ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

श्रीरामजी ने कहा : मान्यतम, आपने ये जो पूर्वोक्त जीवसृष्टि-लता के बीज बतलाये, उनमें से किस बीज की निवृत्ति करने से परमपद प्राप्त किया जा सकता है ? यह तो एक अर्थ हुआ । दूसरा अर्थ इस प्रकार हे : हे भगवान्‌, आपने ये जो अभी मोक्ष के ˆअथाऽस्याः संविदो राम" इत्यादि से भूमिका विशेषरूप बीज बतलाये, उनमें से किस बीज का अवलम्बन करने से परम पद प्राप्त किया जा सकता है ? यह कृपाकर मुझसे कहिए

सर्ग सन्दर्भ

इक्यानबेवाँ सर्ग समाप्त बानबेवाँ सर्ग पूर्वोक्त स्थितिविशेषों मे यत्न के गौरव ओर लाघव का तथा वासना आदि के प्रक्षयपूर्वक ज्ञान के सहाभ्यास का वर्णन |