Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 84
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 84 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 84
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
शंका का समाधान कर अब प्रकृत विषय का समर्थन कर रहे महात्मा वसिष्ठ जी कहते हैं:
समस्त वासनाओं के त्याग के अनन्तर होनेवाली निर्विकल्प समाधि से असीम आनन्द उस प्रकार
प्रतीत होता हे, जिस प्रकार आकाश से असीम नीलापन प्रतीत होता है