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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verses 82–83

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verses 82–83 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 82,83

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उक्त वाक्य का अनागत विषयों में भी तात्पर्य खोलते हुए उसे कहते हैं । वासना वर्जित होने के कारण अपनी आत्मा में जब किसी भविष्यत्‌ पदार्थ की भावना नहीं की जाती ओर बालक एवं मूक के विज्ञान के सदृश स्थिर होकर स्थिर रहता है, तब जडता से विनिर्मुक्त, विशाल एवं स्वच्छ विज्ञान का अवलम्बन हो जाता है, इससे प्राज्ञ पुनः लिप्त नहीं होता