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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 81

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 81 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 81

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

विश्रान्तास्थो न कुत्रचिद्‌” इस अंश का भी अतीत विषयो में तात्पर्य खोलते हुए उसे ही कहते हैं । हे श्रीरामभद्र, जिस महात्मा की बुद्धि प्रिय और अप्रिय शब्द आदि विषयों से तनिक भी आसक्त नहीं होती, वही अजड़ संवित्‌ और जीवन्मुक्त कहा जाता है