Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 80
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 80 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 80
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
संवित्-शब्द का पूर्वोक्त अर्थ बतलाते हुए कथित भाव का ही समर्थन करते है ।
श्रीरामजी, सत्यत्व बुद्धि से चिति का बाह्य अर्थो का अवलम्बन करना ही संवित् कहा जाता हे,
उक्त प्रकार की संवित् जिस महापुरुष को नहीं होती, वह असंवित् अजड कहा जाता हे, फिर वह
सैकड़ों कार्यो में व्यस्त ही क्यों न हो ? इससे “सर्वत्रानवस्तास्थः“ इस पद का तात्पर्य प्रकट
किया