Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
दुःखदोषशतादग्धा विदन्ति न विदन्ति वा ।
आगमापायिनोऽनित्या नरकस्वर्गमानुषैः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
इन महानुभावो की वासना भूजे बीज के
सदृश पुनर्जन्म से शून्य और रस से वर्जित यानी विषयानुरक्ति से रहित हे, वे महानुभाव जीवन्मुक्त
होकर अवस्थित रहते हैं