Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 35
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 35
संस्कृत श्लोक
अङ्कुशेन विना मत्तं यथा दुष्टं मतङ्गजम् ।
अध्यात्मविद्याधिगमः साधुसङ्गम एव च ॥ ३५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे भद्र, दृढ़ अभ्यास के कारण देह आदि पदार्थो में “अहम्, मम” आदि आत्माध्यासरूप एकमात्र
वासना से ही जन्म, जरा ओर मरण में हेतुभूत अतिचपल चित्त की उत्पत्ति होती है