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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 36

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 36 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 36

संस्कृत श्लोक

वासनासंपरित्यागः प्राणस्पन्दनिरोधनम् । एतास्ता युक्तयः पुष्टाः सन्ति चित्तजये किल ॥ ३६ ॥

हिन्दी अर्थ

इसीलिए वासना के विनाश से विति की स्वस्थतारूप मुक्ति होती है, ऐसा कहते है। जो कुछ भी हेयस्वरूप ओर उपादेय स्वरूप वस्तु है, वह जब अस्तित्व प्राप्त नहीं करती और सबका परित्याग कर अवस्थित रहती है, तब चित्त उत्पन्न नहीं होता