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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 114

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 114 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 114

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

उरी प्रत्यक्रूप ब्रह्म मे अध्यस्त होने के कारण ये सब पदार्थ इन्द्रियप्रीति उत्पन्न करते हें । जिस प्रकार जीभ से छ: रस स्फूर्तिं या सत्ता प्राप्त करते हे, वैसे ही आनन्द के सागर उसी ब्रह्म से सभी प्रकार के आनन्द स्फूर्ति या सत्ता प्राप्त करते हँ