Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 112
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 112 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 112
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
परम पुरुषार्थरूपता बतलाने के लिए उसीकी प्रशंसा करते हैं ।
वही पद समस्त हेतुओं का हेतु है, उसका कोई दूसरा हेतु नहीं है, वही सम्पूर्णं सारो मे सारभूत
है, उससे बढ़कर दूसरी सारभूत वस्तु नहीं है