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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 111

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, verse 111 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 111

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

जिस पद में सद्धर्मता भी लीन हो जाती है और जो निर्विकाररूप से अवस्थित है, उस पद में अपना दृढ़ स्थान कर लेनेवाला पुरुष कभी इस दुःखमय संसार मेँ आता नहीं है और वही असलियत में पुरुष है, दूसरा तो स्त्रीप्राय है, यह भाव है