Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 91, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 91 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
योगिनश्चित्तशान्त्यर्थं कुर्वन्ति प्राणरोधनम् ।
प्राणायामैस्तथा ध्यानैः प्रयोगैर्युक्तिकल्पितैः ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
कथित अर्थ का ही विस्तार करते है।
वहाँ यानी अरूप चित्त विनाश दशा मेँ न मत्री आदि गुण है, न गुणाभाव यानी मनोदोष हैं, न
श्री (गुणसमृद्धि) है, श्री का अभाव (दोषसमृद्धि) है, चपलता है, न उदय है, न अस्त है, न
हर्ष हे, न अमर्ष है और न पृथक् तदीय परिज्ञान है