Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verses 28–29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verses 28–29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 28,29
संस्कृत श्लोक
न वासना न रचना नेहानीहे न रञ्जना ।
न सत्ता नापि वाऽसत्ता नच साध्यं हि तत्पदम् ॥ २८ ॥
अतमस्तेजसा व्योम्ना वितारेन्द्वर्कवायुना ।
तत्समं शरदच्छेन निःसंध्येनारजस्त्विषा ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे विष को हरण करनेवाले ओषध आदि द्रव्यो की शक्ति अपने कार्य में समर्थ है, वैसे मणि, मन्त्र
आदि की शक्ति भी अपने-अपने कार्य में समर्थ है, ऐसा कहते है ।
जैसे विषघ्न मणि, मन्त्र आदि द्रव्य की शक्तियाँ विष का विनाश कर देती हैं, जैसे मदिरा मत्त कर
देती है, जैसे माक्षिक मधु अथवा मदनफल खाने पर वमन करा देता है, वैसे योगादि उपायों में कुशल
पुरुषों द्वारा प्रयुक्त मणि आदि द्रव्य, काल, क्रिया आदि उपाय स्वभाववश से सिद्धियों को अवश्य
उत्पन्न करते हैं