Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
न तेजो न तमः किंचिन्न संध्या दिनरात्रयः ।
न दिशो न च वाकाशो नाधो नानर्थरूपता ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी, मणि आदि द्रव्य, काल,
योगाभ्यास आदि क्रिया और मन्त्र प्रयोगो मे उक्त प्रकार की शक्तिर्या, जो आकाशगमन आदि शब्दों से
कही जाती हैं, स्वभावतः सिद्ध हैं