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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 30

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 30

संस्कृत श्लोक

ये हि पारं गता बुद्धेः संसाराचरणस्य च । तेषां तदास्पदं स्फारं पवनानामिवाम्बरम् ॥ ३० ॥

हिन्दी अर्थ

हे पापशून्य राघव, द्रव्य-काल-क्रियाक्रमस्वरूप आविद्यक विषयों से परे तथा अज्ञान को बाधित कर देनेवाले आत्मज्ञान में आकाशगमन आदि सिद्धियों के प्रति कारणता और विरोधिता नहीं है